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UP Cabinet Expansion: ‘सात’ से सियासी चक्रव्यूह का सातवां द्वार भेदने की तैयारी, जातीय असंतुलन दूर करने पर ध्यान


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्‍तव
Updated Mon, 27 Sep 2021 12:48 AM IST

सार

विस्तार में मंत्री बनाए गए चेहरों में जितिन प्रसाद सहित कुछ अन्य पहले दूसरे दलों में रहे हैं। इन्हें मंत्री बनाकर भाजपा ने दूसरे दलों के प्रभावी नेताओं को प्रतीकों से भाजपा का मूक आमंत्रण भी दे दिया है। उन्हें यह भरोसा दिलाने की कोशिश की गई है कि वे आएंगे तो उनके पद व कद का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी और राज्यपाल के साथ नए मंत्री
– फोटो : अमर उजाला

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विधानसभा चुनाव से करीब पांच माह पूर्व योगी सरकार के बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार में एक कैबिनेट मंत्री सहित सात नए चेहरों को शामिल कर भाजपा ने सात से 2022 के चुनावी समीकरण साधने और सियासी चक्रव्यूह का सातवां द्वार तोड़ने की कोशिश की है। सात में छह चेहरों का गैर यादव पिछड़ी और गैर जाटव अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति से चयन भाजपा के समग्र हिंदुत्व के समीकरण के संदेश को मजबूती दे रहा है। शोषित व वंचित वर्गों को सत्ता में भागीदारी देने का बड़ा सियासी संदेश भी है।

विस्तार के जरिए कोरोना काल में वर्तमान मंत्रिमंडल के तीन सदस्यों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत से उत्पन्न क्षेत्रीय व जातीय असंतुलन को दूर करने के साथ पश्चिम व पूर्वांचल के बीच भी संतुलन साधा गया है। यही नहीं, इसके जरिए पार्टी के कोर वोट के साथ नए वर्गों को भी साथ लाने का संदेश है। जिन लोगों को शपथ दिलाई गई है उनमें जितिन प्रसाद के रूप में एक अगड़ा (ब्राह्मण), तीन पिछड़े, दो अनुसूचित जाति और एक अनुसूचित जनजाति का चेहरा है। संजीव कुमार गोंड के रूप में अनुसूचित जनजाति के किसी चेहरे को पहली बार मंत्रिमंडल में शामिल करके न सिर्फ प्रदेश में जहां-तहां बसे वनवासी और आदिवासी जातियों को भाजपा के साथ लाने, बल्कि मिर्जापुर, सोनभद्र के साथ चित्रकूट के कुछ हिस्सों में इनके कारण मतदान पर पड़ने वाले प्रभाव का ध्यान देते हुए सियासी समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है। विस्तार में पश्चिम से चार व पूरब से तीन चेहरों को लेकर क्षेत्रीय संतुलन बनाने पर भी ध्यान दिया गया है।
 

कुर्मी वोट भाजपा का परंपरागत मतदाता माना जाता है। बीते दिनों संतोष गंगवार की केंद्रीय मंत्रिमंडल से विदाई के बाद बरेली के बहेड़ी से ही भाजपा विधायक छत्रपाल गंगवार को मंत्रिमंडल में लेकर भाजपा ने कुर्मियों की नाराजगी का खतरा दूर करने के साथ इनके सम्मान का ध्यान रखने का संदेश दिया है। प्रदेश की अनसूचित जाति की आबादी में करीब 3 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाली खटिक व सोनकर बिरादरी को भी इस विस्तार में जगह देकर गैर जाटव मतदाताओं की भाजपा के साथ लामबंदी मजबूत की गई है। बलरामपुर से विधायक पल्टूराम और मेरठ की हस्तिनापुर से विधायक दिनेश खटिक के रूप में इन्हें दो स्थान देकर भाजपा ने अपने परंपरागत कोर वोट को संतुष्ट ही नहीं किया, बल्कि यह  संदेश भी दिया है कि उसे अपने कोर वोट का  पूरा ख्याल है। डॉ. संगीता के रूप में न सिर्फ पूर्व के मंत्रिमंडल में शामिल कमल रानी वरुण की मौत से कम हुए महिला प्रतिनिधित्व को संतुलित किया गया है, बल्कि पूर्वी यूपी में वोटों के लिहाज से प्रभावी बिंद जाति को भी साधने का काम करके पिछड़ों में 10 प्रतिशत की भागादारी वाली निषाद व मल्लाह जैसी बिरादरियों के समूह को और मजबूती से साथ रखने की कोशिश की है।

इस तरह भी साधी गणित
लोकसभा के दो बार सांसद और केंद्र की मनमोहन सरकार में मंत्री रहे शाहजहांपुर के जितिन प्रसाद को लेकर न सिर्फ चेतन चौहान की मृत्यु से मंत्रिमंडल में घटे अगड़ी जाति के प्रतिनिधित्व को संतुलित किया गया है, बल्कि प्रदेश में बीते कुछ महीनों से ब्राह्मणों की अनदेखी की खबरों को भी खारिज करने की कोशिश की है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि भाजपा में शामिल होने से पहले जितिन ने खुद इस मुद्दे पर अभियान चलाया था। जाहिर है कि भाजपा ने उन्हें ही कैबिनेट मंत्री की शपथ दिलाकर यह संदेश दे दिया है कि वर्तमान सरकार में ब्राह्मणों की अनदेखी की अटकलें पूरी तरह निराधार है। इसी तरह धर्मवीर प्रजापति को मंत्री बनाकर भाजपा ने पिछड़ों में गैर यादव 3 प्रतिशत प्रजापति व कुम्हार जाति को भाजपा के साथ जोड़ने की कोशिश की है।

विस्तार में मंत्री बनाए गए चेहरों में जितिन प्रसाद सहित कुछ अन्य पहले दूसरे दलों में रहे हैं। इन्हें मंत्री बनाकर भाजपा ने दूसरे दलों के प्रभावी नेताओं को प्रतीकों से भाजपा का मूक आमंत्रण भी दे दिया है। उन्हें यह भरोसा दिलाने की कोशिश की गई है कि वे आएंगे तो उनके पद व कद का पूरा ध्यान रखा जाएगा। यह बात जरूर है कि प्रदेश के मंत्रिमंडल में 60 सदस्यों का अधिकतम कोटा पूरा करने के बावजूद कुछ स्थानों या क्षेत्रों को जगह नहीं मिल पाई है, लेकिन मंत्रियों की सीमित संख्या की बाध्यता देखते हुए भाजपा ने जिस तरह संतुलन साधने की कोशिश की है उससे जो थोड़ा असंतुलन है, उसका बहुत महत्व नहीं रह गया है।

सबका साथ-सबका विश्वास
मंत्रिमंडल पर नजर दौड़ाएं तो भाजपा ने इन सात चेहरों के जरिए हर वर्ग और क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देकर सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास मंत्र पर अमल का संदेश भी देने की कोशिश की है। सामाजिक समरसता का ध्यान रखते हुए यह भी संदेश देने का प्रयास हुआ है कि भाजपा की कोशिश समाज में अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को अवसर देकर उसे देश व प्रदेश के विकास में हिस्सेदारी देना है। मंत्रिपरिषद में इस समय 53 मंत्री हैं। सात मंत्रियों को शामिल करने के बाद यह संख्या 60 हो गई है। मंत्रिमंडल में अब सभी वर्गों और क्षेत्रीय संतुलन की झलक दिखाई देती है। राजनीतिक विश्लेषक प्रो. एपी तिवारी कहते भी हैं कि विस्तार से जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में शामिल पं. दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय अर्थात समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भागीदारी व सम्मान देने के संकल्प का संदेश निकल रहा है। इसके जरिए समावेशी राजनीति को भी मजबूती देने की कोशिश हुई है। इससे योगी सरकार के बेहतर विकास प्रदर्शन के साथ अस्मिता की राजनीति को ताकत मिलेगी।

विस्तार

विधानसभा चुनाव से करीब पांच माह पूर्व योगी सरकार के बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार में एक कैबिनेट मंत्री सहित सात नए चेहरों को शामिल कर भाजपा ने सात से 2022 के चुनावी समीकरण साधने और सियासी चक्रव्यूह का सातवां द्वार तोड़ने की कोशिश की है। सात में छह चेहरों का गैर यादव पिछड़ी और गैर जाटव अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति से चयन भाजपा के समग्र हिंदुत्व के समीकरण के संदेश को मजबूती दे रहा है। शोषित व वंचित वर्गों को सत्ता में भागीदारी देने का बड़ा सियासी संदेश भी है।

विस्तार के जरिए कोरोना काल में वर्तमान मंत्रिमंडल के तीन सदस्यों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत से उत्पन्न क्षेत्रीय व जातीय असंतुलन को दूर करने के साथ पश्चिम व पूर्वांचल के बीच भी संतुलन साधा गया है। यही नहीं, इसके जरिए पार्टी के कोर वोट के साथ नए वर्गों को भी साथ लाने का संदेश है। जिन लोगों को शपथ दिलाई गई है उनमें जितिन प्रसाद के रूप में एक अगड़ा (ब्राह्मण), तीन पिछड़े, दो अनुसूचित जाति और एक अनुसूचित जनजाति का चेहरा है। संजीव कुमार गोंड के रूप में अनुसूचित जनजाति के किसी चेहरे को पहली बार मंत्रिमंडल में शामिल करके न सिर्फ प्रदेश में जहां-तहां बसे वनवासी और आदिवासी जातियों को भाजपा के साथ लाने, बल्कि मिर्जापुर, सोनभद्र के साथ चित्रकूट के कुछ हिस्सों में इनके कारण मतदान पर पड़ने वाले प्रभाव का ध्यान देते हुए सियासी समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है। विस्तार में पश्चिम से चार व पूरब से तीन चेहरों को लेकर क्षेत्रीय संतुलन बनाने पर भी ध्यान दिया गया है।

 


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