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allahabad high court : छत्तीसगढ़ कैडर केपूर्व आईएएस को हाईकोर्ट से मिली राहत


अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 15 Jan 2022 05:42 AM IST

सार

यह आदेश न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने एक्सप्रेस माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड व दो अन्य की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने याची को राहत देते हुए कुछ शर्तें भी लगाई हैं।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ कैडर केपूर्व आईएएस बाबू लाल अग्रवाल की नोएडा स्थित भवन को संबद्ध किए जाने के मामले में राहत दे दी है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जब तक प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अपीलीय न्यायाधिकरण प्राधिकारी की नियुक्ति नहीं हो जाती है, तब तक के लिए उसका यह आदेश प्रभावी रहेगा।

यह आदेश न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने एक्सप्रेस माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड व दो अन्य की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने याची को राहत देते हुए कुछ शर्तें भी लगाई हैं। कोर्ट ने याची को एक करोड़ रुपये की बैंक गारंटी देनेे के लिए कहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने भवन के विक्रय पर रोक लगा दी है। यह भी आदेश दिया है कि याची संपत्ति (आवासीय भवन) को किसी तीसरे को स्थानांतरित नहीं कर सकेगा और न ही गिरवी रख सकेगा।

मामले में याची मेसर्स एक्सप्रेस माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड ने ईडी के उप निदेशक द्वारा 27 नवंबर 2020 को आय से अधिक संपत्ति के मामले में नोएडा स्थित भवन को संबद्ध कर जांच किए जाने के मामले में रोक लगाकर उस पर आदेश दिए जाने की मांग की थी। ईडी के अधिवक्ता मनुवर्धन ने याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाया।

कहा कि याचिकाकर्ता रायपुर छत्तीसगढ़ का निवासी है। जिस प्राधिकारी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (प्रिवेंशन ऑफ मनी लांन्ड्रिग एक्ट -पीएमएलए) की धारा पांच (एक) के तहत कार्रवाई की है, वह छत्तीसगढ़ में तैनात है। इसलिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय को वर्तमान याचिका पर विचार करने का कोई अधिकार नहीं है। 

याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता निश्चित ही रायपुर छत्तीसगढ़ का स्थायी निवासी है, लेकिन मौजूदा संपत्ति (भवन) न्यायालय के अधिकार के अंतर्गत है। इसलिए उसे आदेश पारित करने का अधिकार है। न्यायालय के पास सरकार, प्राधिकरण या व्यक्ति को निर्देश, आदेश जारी करने की शक्ति है। यह भी तर्क दिया कि  प्रतिवादी की ओर से याची को नोटिस जारी करने का अधिकार भी नहीं है।

केंद्र सरकार अध्यादेश के माध्यम से अपीलीय न्यायाधिकरण का गठन करेगी। इस समय ईडी का अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष का पद खाली पड़ा है। इस पर कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए याची को अपीलीय न्यायाधिकरण प्राधिकारी की नियुक्ति होने तक राहत दे दी।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ कैडर केपूर्व आईएएस बाबू लाल अग्रवाल की नोएडा स्थित भवन को संबद्ध किए जाने के मामले में राहत दे दी है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जब तक प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अपीलीय न्यायाधिकरण प्राधिकारी की नियुक्ति नहीं हो जाती है, तब तक के लिए उसका यह आदेश प्रभावी रहेगा।

यह आदेश न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने एक्सप्रेस माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड व दो अन्य की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने याची को राहत देते हुए कुछ शर्तें भी लगाई हैं। कोर्ट ने याची को एक करोड़ रुपये की बैंक गारंटी देनेे के लिए कहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने भवन के विक्रय पर रोक लगा दी है। यह भी आदेश दिया है कि याची संपत्ति (आवासीय भवन) को किसी तीसरे को स्थानांतरित नहीं कर सकेगा और न ही गिरवी रख सकेगा।

मामले में याची मेसर्स एक्सप्रेस माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड ने ईडी के उप निदेशक द्वारा 27 नवंबर 2020 को आय से अधिक संपत्ति के मामले में नोएडा स्थित भवन को संबद्ध कर जांच किए जाने के मामले में रोक लगाकर उस पर आदेश दिए जाने की मांग की थी। ईडी के अधिवक्ता मनुवर्धन ने याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाया।

कहा कि याचिकाकर्ता रायपुर छत्तीसगढ़ का निवासी है। जिस प्राधिकारी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (प्रिवेंशन ऑफ मनी लांन्ड्रिग एक्ट -पीएमएलए) की धारा पांच (एक) के तहत कार्रवाई की है, वह छत्तीसगढ़ में तैनात है। इसलिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय को वर्तमान याचिका पर विचार करने का कोई अधिकार नहीं है। 

याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता निश्चित ही रायपुर छत्तीसगढ़ का स्थायी निवासी है, लेकिन मौजूदा संपत्ति (भवन) न्यायालय के अधिकार के अंतर्गत है। इसलिए उसे आदेश पारित करने का अधिकार है। न्यायालय के पास सरकार, प्राधिकरण या व्यक्ति को निर्देश, आदेश जारी करने की शक्ति है। यह भी तर्क दिया कि  प्रतिवादी की ओर से याची को नोटिस जारी करने का अधिकार भी नहीं है।

केंद्र सरकार अध्यादेश के माध्यम से अपीलीय न्यायाधिकरण का गठन करेगी। इस समय ईडी का अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष का पद खाली पड़ा है। इस पर कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए याची को अपीलीय न्यायाधिकरण प्राधिकारी की नियुक्ति होने तक राहत दे दी।



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