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Friday, September 24, 2021
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सुप्रीम कोर्ट का सुझाव: आत्महत्या करने वाले कोरोना पीड़ितों के डेथ सर्टिफिकेट में बीमारी को ही बताएं मौत की वजह


कोरोना से मौत को मृत्यु प्रमाणपत्र में दर्ज करने के सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने संतोष जताया है. कोर्ट ने कहा है कि कोरोना पीड़ित के आत्महत्या करने पर भी मौत की वजह कोरोना लिखने पर विचार किया जाए. 23 सितंबर को मामले की अगली सुनवाई होगी. कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि तब तक न्यूनतम मुआवजे पर भी सरकार फैसला ले लेगी.

क्या है मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने रीपक कंसल और गौरव बंसल नाम के 2 याचिकाकर्ताओं की अलग-अलग याचिकाओं पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन ऑथोरिटी (NDMA) को कोरोना से हुई मौत के लिए न्यूनतम मुआवजा तय करने के लिए कहा था. 30 जून को दिए इसी फैसले में कोर्ट ने सरकार से मृत्यु-प्रमाणपत्र में मौत की वजह कोरोना लिखे जाने की व्यवस्था बनाने के लिए कहा था.

केंद्र का हलफनामा

केंद्र ने हलफनामा दायर कर मृत्यु-प्रमाणपत्र के बारे में जारी नए दिशानिर्देश की जानकारी दी है. इन निर्देशों में यह कहा गया है कि अगर RT-PCR,  मोलेक्यूलर टेस्ट, RAT या अस्पताल में हुई किसी जांच में मरीज को कोरोना की पुष्टि हुई हो, तो डेथ सर्टिफिकेट में लिखा जाएगा कि मौत की वजह कोरोना है. घर या अस्पताल, दोनों जगह हुई मौत के लिए ऐसे प्रमाणपत्र जारी होंगे. लेकिन ज़हर के चलते हुई मौत, आत्महत्या, हत्या या दुर्घटना से हुई मौत के मामले में भले ही मृतक कोरोना पॉजिटिव रहा हो, डेथ सर्टिफिकेट में मौत की वजह कोरोना नहीं लिखी जाएगी.

हर जिले में वरिष्ठ प्रशासनिक और चिकित्सा अधिकारियों की एक कमिटी बनाई जाएगी. उसकी मंज़ूरी से ही कोरोना मृत्यु-प्रमाणपत्र जारी होंगे. जिन लोगों को अपने परिवार में हुई किसी मौत के लिए जारी डेथ-सर्टिफिकेट पर आपत्ति हो, वह जिलाधिकारी को आवेदन दे सकते हैं. आवेदन कमिटी के पास भेजा जाएगा. कमिटी तथ्यों की जांच करेगी और 30 दिनों के भीतर आवेदन का निपटारा कर देगी.

आज क्या हुआ?

जस्टिस एम आर शाह की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्रीय आयुष मंत्रालय और ICMR की तरफ से जारी इस निर्देश की सराहना की. लेकिन जजों के यह मानना था कि आत्महत्या करने वाले कोरोना पीड़ित के मौत की वजह भी कोरोना ही मानी जानी चाहिए. कोर्ट के इस सुझाव का सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने भी समर्थन किया. उन्होंने कहा कि वह सरकार से इस पर विचार करने के लिए कहेंगे.

जजों ने यह भी जानना चाहा है कि राज्य सरकारें इस दिशानिर्देश पर किस तरह काम करेंगी? जिला स्तर पर कमिटी का गठन कब तक हो जाएगा? जिन लोगों की मृत्यु पहले हो चुकी है, उनके परिवार को नए डेथ सर्टिफिकेट के लिए कौन से कागज़ात दिखाने होंगे? सुनवाई के दौरान कोर्ट ने न्यूनतम मुआवजा अब तक तय न होने पर भी सवाल उठाया. सॉलिसीटर जनरल ने कहा कि जल्द ही इसे तय कर लिया जाएगा. कोर्ट ने लिखित आदेश में उनके इस बयान को भी दर्ज किया है.

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