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Wednesday, September 22, 2021
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क्लाइमेट चेंज से बिगड़ रहा है आपके फेवरेट Dry Foods का टेस्ट, जानें ऐसा क्यों?


Dry Foods : पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण बने जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के चलते कई देश बाढ़ और सूखे की अप्रत्याशित स्थितियों का सामना कर रहे हैं. यही नहीं, मौसम में अचानक बदलाव और ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) से खाद्यान्न सुरक्षा (Food Security) पर भी संकट मंडरा रहा है. दैनिक जागरण में छपी रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ सनशाइन कोस्ट (University of Sunshine Coast) के लेक्चरर डॉ चरित रत्नायक (Dr Charith Rathnayaka) ने ऑस्ट्रेलिया को आधार बनाते हुए बताया है कि कैसे बदलता मौसम फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के समक्ष संकट पैदा कर रहा है.

फलों-सब्जियों की बदल रही संरचना (Composition)
रिपोर्ट में आगे लिखा है, ऑस्ट्रेलिया में सूखे की समस्या गंभीर हो रही है. सूखा मौसम फलों और सब्जियों की क्वालिटी को प्रभावित करता है, ज्यादा सूखे मौसम में तैयार होने वाले फल व सब्जियों को ड्राई फूड में तब्दील करना ज्यादा मुश्किल होता है.

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ऑस्ट्रेलिया में बड़े पैमाने पर ड्राई फूड का सेवन होता है. साथ ही करीब 70 फीसदी उत्पाद का निर्यात भी होता है. 2018-19 में ऑस्ट्रेलिया ने 2.51 करोड़ डॉलर (करीब 185 करोड़ रु.) मूल्य की विभिन्न प्रकार की किशमिश का निर्यात किया था. मौसम में हो रहा बदलाव ऐसे में ड्राई फूड पर निर्भर कई देशों में अर्थव्यवस्थाओं के लिए संकट बन रहा है.

सूखे का असर
डॉ चरित रत्नायक के अनुसार, लगातार सूखे की स्थिति से पौधों के सेल्स और टिश्यू में पानी की मात्रा कम होने लगती है. इससे फलों व सब्जियों की संरचना (Composition) बदलती है. उदाहरण के तौर पर, सूखा पड़ने से सेब सबसे ज्यादा सख्त होने लगते हैं और उन्हें सुखाकर ड्राई फूड बनाना मुश्किल हो जाता है. पौधे छोटे होने और उत्पादन कम होने का खतरा भी बढ़ जाता है. आलू चिप्स, किशमिश और इस तरह के अन्य ड्राई फूड की प्रोसेसिंग भी मुश्किल होती है. यही नहीं, उनका स्वाद भी प्रभावित होता है और कई बार ऐसे उत्पाद इस्तेमाल के लायक ही नहीं रह जाते हैं.

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समय रहते संभलने की जरूरत
रिपोर्ट में आगे लिखा है कि इंटरगर्वमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) की पिछले दिनों आई रिपोर्ट में चेताया गया है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाया गया, तो हालात और बदतर होंगे. वैश्विक तापमान तेजी से बढ़ रहा है. निश्चित तौर पर ऑस्ट्रेलिया और उससे मिलती-जुलती जलवायु वाले अन्य इलाकों में सूखे की स्थिति और गंभीर होगी. भारत सरकार ने हाल के वर्षों में फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने की दिशा में कई उल्लेखनीय कदम उठाए हैं. जलवायु परिवर्तन का संकट इन प्रयासों पर भी भारी पड़ सकता है.

कैसे निकलेगी समाधान की राह
निश्चित तौर पर इस सकंट का पहला समाधान यही है कि सभी सरकारें मिलकर जलवायु परिवर्तन के खतरों को कम करने की दिशा में जरूरी कदम उठाएं. ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित किया जाए, जिसमें ग्लोबल वार्मिंग का खतरा कम हो, इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया के रिसर्चर्स और इंजीनियर फूड प्रोसेसिंग की प्रक्रिया में बदलाव पर भी शोध कर रहे. इससे बदली संरचना वाले फलों एवं सब्जियों से ड्राई फूड बनाना आसान हो सकेगा. हालांकि यह जटिल प्रक्रिया है और इसके लिए पौधों की कोशिकाओं में से होने वाले परिवर्तन को समझने की जरूरत होगी. यह तरीका तात्कालिक है. इस संकट से बाहर आने के लिए जलवायु परिवर्तन के खतरों को कम करना ही स्थायी समाधान है.

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