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Saturday, September 18, 2021
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कोरोना संक्रमण के बाद युवाओं के फेफड़े पहले जैसे ही हुए सक्रिय – रिसर्च


 Lung function after covid-19: कोरोना संक्रमण का सबसे बुरा असर फेफड़े पर पड़ता है लेकिन अब एक नई रिसर्च में दावा किया जा रहा है कि कोरोना सक्रमण के कारण युवा वयस्कों में फेफड़ें खराब होने की आशंका बहुत कम है. एचटी की खबर के मुताबिक कोविड-19 के संक्रमण से युवाओं के फेफड़े प्रभावित नहीं होते और फेफड़े पहले जैसे ही काम करते हैं. यानी फेफड़ों के काम करने की क्षमता पर कोई असर नहीं होता. इस रिसर्च पेपर को हाल ही में वर्चुअल यूरोपियन रेस्पीरेटरी सोसाइटी इंटरनेशनल कांग्रेस (virtual’ European Respiratory Society International Congress) में पेश किया गया है. इस पेपर के मुताबिक अगर यंग एज में कोरोना का संक्रमण हुआ है तो फेफड़ों के काम करने की क्षमता पर असर नहीं होगा. स्वीडन में कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट (Karolinska Institute) के शोधकर्ता डॉ इडा मोगेंसेन (Dr Ida Mogensen) ने बताया कि जो लोग अस्थमा के भी शिकार थे, उन्हें भी कोरोना संक्रमण के बाद लंग फंक्शन पर किसी तरह का असर नहीं हुआ. हालांकि सांस लेने में उन्हें तकलीफ जरूर हुई लेकिन फेफड़े के काम करने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ा.

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बच्चों और किशोरों के फेफड़ों पर भी कोई असर नहीं
एक दूसरे अध्ययन में भी दावा किया गया है कि जिन बच्चों और किशोरों को कोरोना संक्रमण हुआ था, उनके फेफड़ों के काम करने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ा है. उनके फेफड़ें जिस तरह कोरोना से पहले काम करते थे, वैसे अब भी काम करते हैं. किशोरों और बच्चों के फेफड़े कोरोना से संक्रमण के बाद भी सुरक्षित हैं. हालांकि जिन बच्चों और किशोरों को कोरोना का गंभीर संक्रमण हुआ था, उनके फेफड़े पर असर हुआ है.

डॉ इडा मोगेंसेन ने कहा, कोरोना के बाद लोगों में यह चिंता थी कि कोरोना से ठीक होने के बाद क्या फेफड़ें हेल्दी रहेंगे या अगर हेल्दी रहेंगे तो ये कितने दिनों तक हेल्दी रहेंगे. यह चिंता खासकर उन लोगों में थी जो युवा थे क्योंकि आम आबादी में संक्रमण लगने के बाद भी युवा इससे ठीक होकर उबर जाते हैं.

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पहले जैसे ही फेफड़ें कर रहे काम
स्टॉकहोम में हुए इस अध्ययन में ऐसे युवाओं को शामिल किया जिनकी औसत उम्र 22 साल थी और इनका जन्म 1994 से 1996 के बीच हुआ था. कोरोना से पहले 2016 से 2019 के बीच इन लोगों की कई तरह की जांचें हुई थीं. अक्टूबर 2020 से मई 2021 के बीच इन्हें कोरोना का संक्रमण हुआ. इसके बाद इनके लंग फंक्शन टेस्ट किए गए. इसके साथ ही इसनोफिल (eosinophils) और सूजन की भी जांच की गई. इसनोफिल इम्यून सिस्टम का पार्ट होता है. संक्रमित 661 लोगों में से 178 के खून में SARS-CoV-2 के खिलाफ एंटीबॉडी बन गई थी. इस जांच के बाद यह भी साबित हुआ कि कोरोना से पहले और कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद इन लोगों के फेफड़े की कार्य क्षमता पहले जैसी ही थी. डॉ मोंगेशन ने कहा, यह बहुत राहत वाले परिणाम थे.

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