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Monday, January 24, 2022
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कोरोना काल में एंग्जाइटी-अवसाद दूर करने में कारगर हैं एक्सपर्ट के बताए ये 4 टिप्स


Tips to Reduce Depression : पिछले दो सालों से पूरी दुनिया को बुरी तरह प्रभावित करने वाला कोरोना वायरस लोगों के लिए केवल शारीरिक ही नहीं, मानसिक परेशानियों का सबब भी बना है. बीते दो सालों में लोगों ने काफी कुछ देखा है. इसका सीधा असर अब उनकी मेंटल हेल्थ (Mental Health) पर भी दिखाई देने लगा है. यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (University College London) द्वारा अप्रैल 2021 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में पाया गया कि मार्च 2020 में ब्रिटेन में लगे लॉकडाउन में अवसाद और एंग्जाइटी अपने उच्च स्तर पर थे, जबकि लॉकडाउन खुलने के बाद इसमें बड़ी कमी आई. ये स्टडी 40 हजार से ज्यादा लोगों पर की गई थी. ऐसे ही यूएस सेंसस ब्यूरो (US Census Bureau) की रिपोर्ट में पाया गया कि अमेरिकी युवाओं में दिसंबर 2020 में एंग्जाइटी 42% अधिक रही. हालांकि भी सच्चाई है कि इस कठिन समय ने लोगों में जीवन के प्रति सोच में कई तरह के सार्थक बदलाव भी किए हैं. अब लोगों के जीवन के प्रति नजरिए में काफी बदलाव आया है. अब लोग लाइफ में एक पॉजिटिव एप्रोच लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं.

दैनिक भास्कर अखबार में छपी न्यूज रिपोर्ट में लंदन के रिवरमेड गेट मेडिकल सेंटर (Rivermead Gate Medical Centre) के डॉक्टर राजेश यादव (Rajesh Yadav) का मानना है कि अगर आप 20 मिनट की हॉबी, आउटडोर एक्टिविटी या दूसरों की मदद करते हैं तो इससे आपकी एंग्जाइटी कम होती है. डॉ राजेश ने कोरोना काल में अवसाद को दूर करने के कुछ उपाए सुझाए हैं.

मदद के लिए बढ़ाएं हाथ
जर्नल ऑफ हैप्पीनेस स्टडीज (Journal of Happiness Studies) में 2020 में प्रकाशित एक विश्वेषण में पाया गया कि लॉकडाउन के दौरान वॉलेंटियर बनने वाले युवाओं ने इसे सबसे संतोषजनक काम बताया. यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन द्वारा सितंबर 2021 में किए गए एक सामाजिक अध्ययन में हर तीसरे व्यक्ति ने बताया कि उन्हें अपने पड़ोसियों से पहले की तुलना में अधिक सहयोग मिला है. विपरीत परिस्थितियों में सहयोग करने से न केवल जरूरतमंद की निराशा दूर होती है, बल्कि सहयोग करने वाले को भी खुशी मिलती है.

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अपनों का साथ देता है मदद
यूनाइटेड स्टेट सेंसस ब्यूरो (United States Census Bureau) की रिपोर्ट के अनुसार जो लोग अकेले रहते हैं उनमें एंग्जाइटी और अवसाद के लक्षण अधिक पाए जाते हैं. जर्नल स्प्रिंगर लिंक में प्रकाशित शोध बताता है कि महामारी के दौरान जब लोग खुद को दूसरों से जुड़ा हुआ पाते हैं, तो उनमें एंग्जाइटी और अवसाद कम होता है. ऐसे में महामारी में फैमिली मेंबर्स और फ्रेंड्स से दूर रहने फोन, वीडियो कॉल आदि के माध्यम से संपर्क में जरूर रहें.

व्यायाम है जरूरी
जर्नल फ्रंटियर इन साइकोलॉजी में सितंबर 2020 में प्रकाशित सर्वे के अनुसार, जिन लोगों ने लॉकडाउन के दौरान अक्सर एक्सरसाइज की उनमें पॉजिटिव एनर्जी अधिक रही. उनका मूड बेहतर रहा. अमेरिका के मनोवैज्ञानिक जर्नल इंगेज में प्रकाशित लगभग 3000 युवाओं के व्यवहारिक विश्लेषण में पाया गया कि महामारी के शुरुआती दौर में घर पर रहने के दौरान जिन युवाओं ने एक्सरसाइज को जारी रखा वे अवसाद के कम शिकार हुए.

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गार्डिनिंग-पेंटिंग जैसी एक्टिविटी फायदेमंद
नियमित रूप से किए जाने वाले कामों में भी रुचि का कम होने कमजोर मानसिक स्वास्थ्य के लक्षण है. इसे अनहेडोनिया (Anhedonia) कहते हैं. ये भी अवसाद का एक प्रकार है. इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एनवायरमेंटल हेल्थ रिसर्च (International Journal of Environmental Health Research) के अनुसार आउटडोर एक्टिविटी पर यदि 20 मिनट भी खर्च किए जाएं तो व्यक्ति मानसिक रूप से दुरुस्त रह सकता है. गार्डनिंग-पेंटिंग जैसी एक्टिविटी इसमें कारगर हैं.

Tags: Corona, Depression, Health, Lifestyle



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