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Tuesday, September 28, 2021
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अमेरिका में स्थायी रूप से रहने की चाहत रखने वालों के लिए बड़ी खबर, भारतीयों को भी होगा लाभ…


विधेयक में कानूनी आव्रजन प्रणाली में स्थायी संरचनात्मक परिवर्तन शामिल नहीं हैं

वाशिंगटन:

अमेरिका में एक नए विधेयक (US Bill On Permanent Residency) के पारित होने से भारतीयों सहित लाखों लोगों को पूरक शुल्क का भुगतान करके ग्रीन कार्ड (Green Card) प्राप्त करने में मदद मिल सकती है. देश में रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड का वर्षों से इंतजार कर रहे लाखों लोग, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय भी शामिल हैं, एक नया कानून पारित होने पर पूरक शुल्क का भुगतान करके अमेरिका में वैध स्थायी निवास की उम्मीद कर सकते हैं.

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इसे यदि ‘सुलह समझौता पैकेज’ में शामिल किया गया और कानून में पारित किया गया, तो उन हजारों भारतीय आईटी पेशेवरों की मदद करने की उम्मीद है जो वर्तमान में ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं. ग्रीन कार्ड, जिसे आधिकारिक तौर पर स्थायी निवासी कार्ड के रूप में जाना जाता है, अमेरिका में प्रवासियों को जारी किया गया एक दस्तावेज है जो इस बात का प्रमाण है कि उन्हें स्थायी रूप से वहां रहने का विशेषाधिकार दिया गया है.

‘प्रतिनिधि सभा न्याय समिति’ द्वारा जारी बयान के अनुसार एक रोजगार-आधारित अप्रवासी आवेदक पांच हजार अमेरिकी डॉलर के पूरक शुल्क का भुगतान करके अमेरिका में बसने का सपना देख सकते हैं. फोर्ब्स पत्रिका की खबर के अनुसार ईबी-5 श्रेणी (प्रवासी निवेशक) के लिए शुल्क 50,000 डॉलर है. ये प्रावधान 2031 में समाप्त हो रहे हैं. एक परिवार-आधारित प्रवासी के लिए, जो एक अमेरिकी नागरिक द्वारा प्रायोजित है और जिसकी ‘‘प्राथमिकता तिथि दो वर्ष से अधिक है”, ग्रीन कार्ड प्राप्त करने का शुल्क 2,500 अमेरिकी डॉलर होगा.

बयान के अनुसार यदि आवेदक की प्राथमिकता की तारीख दो साल के भीतर नहीं है, लेकिन उन्हें देश में उपस्थित होना आवश्यक है, तो पूरक शुल्क 1,500 अमेरिकी डॉलर होगा. यह शुल्क आवेदक द्वारा भुगतान किए गए किसी भी प्रशासनिक प्रसंस्करण शुल्क के अतिरिक्त होगा. हालांकि विधेयक में कानूनी आव्रजन प्रणाली में स्थायी संरचनात्मक परिवर्तन शामिल नहीं हैं, जिसमें ग्रीन कार्ड के लिए एच -1 बी वीजा के वार्षिक कोटा को बढ़ाना शामिल है. खबर के अनुसार इस विधेयक के कानून बनने से पहले, प्रावधानों को न्यायपालिका समिति, प्रतिनिधि सभा और सीनेट को पारित करना होगा और राष्ट्रपति द्वारा इस पर हस्ताक्षर किए जाने चाहिए.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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